धोबी अपने गधे के ऊपर कपड़े लादकर नदी में जाकर कपड़े धोता था सारे कपड़े सूख जाने पर धोबी गधे पर लादकर घर वापस आता था और गधे को घास चरने के लिए जंगल में छोड़ देता था गधा घास चर कर शाम को घर वापस आता था 1 दिन की बात है गधा वापस नहीं लौटा हरे हरे घास के लोग में जंगल में ही रह गया धोबी परेशान होने लगा उसे नींद नहीं आ रही थी रात गहरी होने वाली थी वह अपने आंगन में बैठकर गधे का इंतजार कर रहा था लेकिन गधे को तो हरे हरे घास की लोग ने पागल कर रखा था इस कारण वह वापस नहीं लौटा चांदनी रात थी धोबी को बहुत गुस्सा आ रहा था वह मन ही मन सोच रहा था आज आए लगाता हूं दो चार डंडे आधी रात हो चली थी गधा वापस नहीं लौटा धोबी एक डंडा लिया और चल पड़ा जंगल की ओर जंगल की और ढूंढ रहा था गधा उसे कहीं नहीं मिल रहा था तब उसे एक झाड़ी में कुछ दिखा धोबी को थोड़ा कम दिखाई देता था उसने सोचा यह मूर्ख गधा यहां बैठा हुआ है लगाता हूं इसे आज डंडे का प्रहार लेकिन वहां गधा ना होकर एक शेर विश्राम कर रहा था उसने आव देखा ना ताव शेर के सर पर दो चार डंडे का प्रहार कर दिया ठंडे का परहार देख शेर का सीटी पीटी गुम हो गया धोबी ने सोचा मूर्ख गधा तो यहां बैठा है चल आज तेरी में आरती उतारता हूं और शेर के गले में रस्सी बांधी और खींचने लगा शेर चलने को तैयार ना था धोबी को गुस्सा आ रहा था दो चार डंडा शेर के ऊपर और लगा दिया शेर चलने को मजबूर हो गया शेर सोचने लगा किस मूर्ख से पाला पड़ा है यह तो मेरा जान ही ले लेगा चुपचाप चलने में ही भलाई है और वह धोबी के साथ चुपचाप चलने लगा धोबी घर पहुंचा और अपने आंगन में खूंटे से शेर को बांध दिया और सोने चला गया सुबह गांव वाले उठ कर इधर-उधर अपने काम पर जा रहे थे उन्होंने देखा यह क्या धोबी के आंगन में शेर बंधा है सब हल्ला करने लगे और इधर-उधर दौड़ने लगे बाप रे धोबी अपने आंगन में शेर को बांध रखा है सोर सुनकर धोबी की आंख खुल गई धोबी उठकर देखा तो अरे बाप रे यह तो शेर है साला गधा कहां रह गया उसने डंडा उठाया और शेर को दो चार डंडा और खींच लिया शेर की हालत पंचर हो चुकी थी वह भागना चाहता था धोबी ने उसके पैर पर दो चार डंडा और पहन कर दिया और उसे खोल दिया शेर खुलते ही वहां से इतना तेजी से भागने लगा पर मन ही मन सोचने लगा किस मूर्ख से पाला पड़ा था सुबह गधा वापस लौटा धोबी ने गधे की अच्छी तरह मरम्मत की बेवकूफ कहां रह गया था तू तुम्हारे चक्कर में बेचारा शेर की मैंने कचूमर निकाल दी गधा माफी मांगने लगा और मन ही मन मुस्कुराने लगा चलो अच्छा ही हुआ शेर का भय तो निकल गया जंगल में अब किसी का डर नहीं शेर मुझे छू भी नहीं सकता मेरे मालिक का डंडा उसे याद होगा धन्यवाद समाप्त Madan kumar sahani
©madan saha
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