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ध्यान मत दो।।

बाज़ नीचे ना देखे
उड़े ऊँचा पर फैलाये..
कौआ बैठे, गर्दन नोचे,
ना एक आह ! चील चिल्लाये..
कद बढ़ाये चील फिर,
की रावें ना सक पाये
आधा - पोना देर में
खुद ही भाग जाए
रहिये बन बाज़
ना देत ध्यान औरन के
काम आपन कर
छोड़त फ़र्ज़ी लोगन के
जो आज बेज्जत करत है
काल वही पीट थप–थपाये
ऊँचाई जो तू उठाये
देख तरक्की तुम्हार
जब जान ले तुम्हरे
तक ना आपाए,
सब जन भी चुप होजाए
©amour_anu