हर वर्ष आती दीपावली है हज़ारों उमंगे भर जाती उपहारों को देने लेने का त्यौहार दीवाली।
हर कोनो को उजियारा करती हज़ारों दीपक की जगमग परिवारों से मिलने का त्यौहार दीवाली है।
चौदह वर्ष का वनवास काट कर आए श्री राम जी की खुशियों में मनाई जाती दिवाली है
क्या हुआ इस बार जैसे दिवाली नहीं दीवाला है ना वो मिलना जुलना है ना वो उपहारों का लेना देना है सब कुछ वही है वजह भी वही राम जी के आने की खुशियों की है परन्तु इस बार करोनासुर नामक राक्षस ने नरसंहार मचाया है ना किसी रामजी और कृष्णाजी ने इसका संहार किया है
इस बार मन ने भी दीवाली ना मनाने की ठानी है
ये कैसी दिवाली की शुभकामनाए है।
©durgeshkul
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