दीवानी मैं ही नहीं उसकी ,दीवाना वो भी हमारा था
अरे सिर्फ दीवानी मैं ही नहीं उसकी, दीवाना वो भी हमारा था,
और क्या बात करूं उन दिनों की
प्यार बराबर लगभग सा हमारा था…..
कॉफी के जमाने में भी वो, चाय का दीवाना था
अब उसकी क्या तारीफ करूं, वो शरीफ बंदा ही हमारा था,और क्या बात करूं उन दिनों की
प्यार बराबर लगभग सा हमारा था…….
प्यार ज़िद्द, अकड़ थी तो क्या ,
मै अगर पैसों पर ना मरने वाली थी तो, वो भी जिस्म पर न मिटने वाला था
अब उसकी क्या तारीफ करूं वह शरीफ बंदा ही हमारा था
और क्या बात करूं उन दिनों की
प्यार बराबर लगभग सा हमारा था…..
जमाने को तो बस डर सता ना था
रास्ते अलग हुए तो क्या, भूल थोड़ी ही जाना था
और क्यों ना करूं तारीफ उसकी ,खुद से पहले हाल जो मेरा पूछने वाला था
दीवानी मैं ही नहीं उसकी ,दीवाना वो भी हमारा था
अरे सिर्फ दीवानी मैं ही नहीं उसकी, दीवाना वो भी हमारा था
और क्या बात करूं उन दिनों की ,
प्यार बराबर लग सकता हमारा था…..
©poetshrii
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