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दिल से

श्रंगार मे मुझे सजाया जा रहा था
इस तरह मुझे छुपाया जा रहा था
चंद शरीर के दागो के कारण असितत्व
ही मेरा मिटाया जा रहा था
मैं कौन हूँ, कया हूँ, कैसी दिखना चाहती हूँ
इन सभी बातो को किनारा कर
मुझे कया से कया बनाया जा रहा था
©Ankita Pan