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$ शायरी

खिजा के हाँथों हमने बहारों को उजड़ते देखा है,
देश में तमाशा न जाने कितनों को करते देखा है,
एक बार नहीं हजारों बार अपनी आँखों से ,
कोरोना जैसे महामारी से जीवन को खिलवार करते देखा है।।
----- संदीप कुमार "संजन"
भगवानपुर,अररिया,बिहार
------!! धन्यवाद मित्रों !!-----------
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©sanjan