गुजाश्त - ए वक्त की हालत ,दोस्त -ए -हाल पर सलाम ।
उसके बदलते फ़िराक़ ,दोस्ती -ए - जज़्बे के नाम को सलाम ।।
हिज़्र -ए - शौक के है दिन , हिज़्र-ए- बदलाव के है दिन ।
उसके बदलाव पर सलाम ,मेरे शौक पर सलाम ।।
अब तो नहीं है,ऐसी दोस्ती-ए- मुमकिन पर, मेरे शौक की नसीब ।
रोज़ - ए - दोस्ती में ,जमाना -ए- दुश्मन के महल पर सलाम ।।
सूर्य -ए- तेज के फ़र्क का अब नहीं हमारी दोस्ती ।
सुबह को अर्ज-ए- दुश्मन, शाम-ए- चाय को सलाम ।।
उसकी दोस्ती था हमसे , मै नतमस्तक -ए- मगरुर दोस्ती पर ।
उसकी दुश्मनी पर , मेरे सीने की ढाल पर सलाम ।।
शिव ! के दारुद -ए- शौक , मगरुर ख्याब -ओ -ख्याल का कुछ भी नहीं ।।
इश्क़ -ए- ख्याब ये दोस्ती ,दोस्त के इश्क पर , दुश्मनी को सलाम ।।
shivam
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