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दोस्त या दुवा।।

मै क्या मिन्नतें मांगू तेरे लिये ,तू खुद मेरे लिये एक फरिश्ता है,
खास से खास होकर जो गुजरता हैं,तू वो किनारा हैं।।
लोग आजकल पूछते है सबब मेरे सादगी का , क्या कहूं उनसे तेरे आने से ही ये अफसाना हैं।।
मिले है हम कुछ दिन पहिले पर लगता है , बरसो पुराना ये नाता है।।
मै क्या मिन्नतें मांगू तेरे लिये , तू खुद मेरे लिये एक फरिश्ता हैं।।
मैंने बहुत बार सुना है ईश्क का अफसाना , रंगीन, मशहूर, शिद्दत भरा होता है, पर मेरे लिये तो तेरी दोस्ती का आलम ही कुछ महंगा खजाना है।। तूने गौर किया होगा कि नहीं पता नहीं , तेरा हर दोस्त , दोस्त बनकर अपनाने लगा हूं,तेरा हर अपना , अपना बनाने लगा हूं।। बस तुझे कहीं खो ना दू इसकी आहट से ये सब करने लगा हूं।।
मै क्या मिन्नतें मांगू तेरे लिये, तू खुद मेरे लिये एक फरिश्ता है।।
अगर कभी तेरी खासियत बताने का आलम कभी आ पड़े तुझ पर , तो बस आवाज़ लगाना एक हक से अपना कहकर ,,
मै तेरी हर अदावो का ऐसा जशन तब्दिल करूंगा , दुनिया दीवानी हो जाएगी तेरे हर किस्सेपर ।।
मै क्या मिन्नतें मांगू तेरे लिये , तू खुद मेरे लिये एक फरिश्ता है।।
बस अगर कभी तेरे लिये दुवा मांगने का वक्त भी आये मुझपर,
मै जान निसार कर दूंगा हसकर तुझपर, बस हो सके तो, तू ऐसे ही रहना , क्यूंकि मेरी कमजोरी हैं तू, वरना दुनिया जलाने का खौक सवार रहता है मूझपर।।
मै क्या मिन्नतें मांगू तेरे लिये, तू खुद मेरे लिये एक फरिश्ता है।।
Vish@l...
©vishal sol