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दोस्ती

कॉलेज का वो
पहीला दिन था,
जब हम सब मिले थे।
ना पहले कभी मिले थे।
ना पहले कभी बोले थे।
फिर भी एक दूसरे के हम
सभी जान बन गए थे।
कहने को तो
दोस्त है सब,
जान बस्ती है
तुम में अब।
चार साल का
सफर हमारा,
बाद में कहा
मिलेंगे दोबारा।
अंजान बन कर आए थे
जान बनकर जाएंगे
फिर कब मिलेंगे
कुछ कह नहीं पाएंगे।

- sanvidha walle
©sanvidha