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दोस्तों के नाम कविता समर्पित

मेरे दोस्तों ! तेरी याद आई तो
"संदीप" फूलों को चुनचुन कर माला बना दिया;
तेरी यादों की यादगार में हमने
सोच-सोचकर छोटी सी कविता रचदिया ।
अखण्ड-विश्व ज्ञान-दीप की ज्योति फैलाने वाले,
पंचायत के जनजन तलक, शिक्षा की मशाल जलाने वाले
बन सुमन वह बच्चों के ज्ञान की खुश्बू फैलाने वाले,
वैसे दिल जितने वाले दोस्त सिकेन्दर की कैसे याद नहीं आनेवाले ।
कौआ-सा सायाना,अटल विश्वास का गहना,
वैसे दोस्त "रंजीत" का मैं हूं दिवाना ;
निजकार्यरत में मैदान मारने वाले , इनके
अदमशाहस का क्या कहना ,
रमजाय जिस भूमिं में , वहाँ जित की है निश्चित गूंजना!
वज्र हृदय,हिम्मत का है खजाना ,
वह देवीलाल दोस्त लोंगटिया याराना;
लव पे आग , वदन में गर्म लहू का दौड़ना,
वह "देवीलाल" है अपना , ज्यदा क्या है दोस्त कहना!!
दर्देदिल की दवा देने वाले, जनजन को कष्ट-पीड़ा दूर करने वाले,
मानव को मानव का ऐहसास दिलाने वाले, परमहितेशी दुखिजनों का ईश्वर कहलाने वाले, हम कैसे वह जिवनदायनी दोस्त "प्रमेश्वरी" को भूलने वाले !!
गाँवों का दीप, आशाओं के प्रकाश है ,
हरयुवाओं के वह मनमित है, एक्ता के गीत हैं !
संघर्ष-शक्ति, मितभाषी,धैर्य का रस-खान है,
हरयुवाओं के वह धड़कते दिल का जान है !!
परोपकार है जिनके रोम-रोम में बसते ,
वह दोस्त "सूरज" महान है !!!
रामपुर का शान, हमारा पहचान है ,
वह कोई और नहीं "सुमाकान्त"है!
रखते हैं हौंसला जगत में पहचान बनाने का,
जिनके अन्दर है हूंनर मानव को भला करने का,
हमें है अटल विश्वास आप ऐसा कर पायेंगे,
बता ये दोस्त!कैसे हम आपको भूलपायेंगे !!
विश्वपटल पर सब दोस्तों के, जय हो जय घोष हो !
नही डरो संघर्षों से,नही डरो बलिदनों से ,
उठो शाहसी जग विजय हो, तेरी अटल विश्वासों से!!
----- संदीप कुमार "संजन"
भगवानपुर ,अररिया,( बिहार)
©sanjan