जरूरत से ज्यादा
अब नींद नहीं आती है,
पता नहीं कब क्यों और कैसे
सोचते-सोचते रात गुजर जाती है।
नाकामयाब है पर नालायक नहीं
परिश्रम करते हैं पर दिखाते नहीं
हर रोज तड़पते हैं उसके लिए
जिसे पाने की क्षमता शायद नहीं।
हर किसी की दास्तान सुनी है
हाथों में छाले और चेहरे जली हैं,
कुदरत के खेल के आगे मजबूरी
मजबूरी में इंसानों की लूट छिपी है।
खूबसूरत है जिंदगी के हर दिन
भूखे पेट मेहनत करते हैं सब
मिल जाएगी सफलता एक दिन
इस विश्वास में ही जी रहे हैं अब
✍️"CLP"
©clp
C