तुझे संभालू या तेरी जुल्फों को,
तुझे देखूं या तेरी आंखों को,
तुझे चूमू या तेरी तस्वीर को,
चंदा देखूं या देखलूं अपनी चांद को,
तुम खोईहो या मैं खो दूं तुझमे खुद को,
अब तो येभी समझ न आता समझ मुझको,
तुझे संभालू या मैं संभालू खुद को।।
आदत जो लग गई है तेरी मुझको,
तेरे बिना जिंदगी वीरान लगे मुझको,
जो अगर तुम हो मेरे साथ तो सारा,
वीरानापन फुलवारी सा लगे मुझको,
तेरी ख्वाबों का आना सुहाना लगे मुझको,
चाहे रब दे धोखा !! मैं नहीं दूंगा तुझको,
खुद से भी ज्यादा चाहने लगा हूं तुझको,
अब तो येभी समझ न आता मुझको,
तुझे संभालूं या मैं संभालू खुद को।।
प्रवीण कुमार उर्फ प्रिंस
©praveenkr
P