J

दर्पण

दर्पण
एक सुनहरा दर्पण टँगा है , दिवार पर ।
सच्चाई लेकर साथ बोलता है खुद पर ।
मिथ्या लोगों के कलिये सभ्यता का आधार माना जाता है ।
सत्यता लोगों कि आँखों में किरकिरी बनकर असभ्य माना जाता है ।
दुसरो में कमियां लाखों निकालते है , लोग ।
अपने अंतर्मन में देखने से कतराते है , लोग ।
पर उपदेश में जो कुशल बन जाते है ।
वे ही हकीकत के दर्पण के समक्ष आने से घबराते है ।
आईना लोगों के सजने संवरने में काम आता है
वही दर्पण समाज कि सच्चाई उजागर करता
है ।