हैलो दोस्तो! मै कौन?
खैर! छोड़िए
ये तो मुझको भी नहीं पता।
जब जब दर्पण पे छाई आती
मेरी आंखे देख मुझे अच्मभित हो जाती
क्योंकि,उस दर्पण में मै नहीं होता
एक भयावह मुखौटा दिख जाता है।
कैसे बताऊं कि, मै कौन?
दर्पण का रूप अलग होता है
और खुद का रूप कुछ अलग होता है।
ये तो दर्पण का खेल है
अगर दर्पण साफ़ है तो अदृश्य रूप भी दिख जाता है,
अगर दर्पण ही जब मैला हो तो
कोई भी रूप कुरूप दिख जाता है।
अब उस ख़ालिस दर्पण कहां से लाऊं
ये दुनिया अभी इस रूप को जिस दर्पण से देख रही है
वो धुंधला होते जा रहा,
अब इस दर्पण पे पालिश कहा से लाऊं।
©Nilesh K
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