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दशहरा

*दशहरा / विजयादशमी*
कन्याभोज, भंडारों के साथ होता है महानवमी का समापन
जवारों की शोभायात्रा और होता प्रतिमाओं का विसर्जन
शस्त्र पूजन के महत्व का
है पुराणों में बखान
दुर्गा मां के समक्ष होती पूर्णाहुति और अनुष्ठान
महा-पंडित रावण के कई थे सकारात्मक पक्ष
लंका में था सुशासन और सिद्धियों में था दक्ष
शिव और ब्रह्मा जी का था ये अनन्य भक्त
प्रजा को रखा खुश, नही हुआ ये सख़्त
श्रीराम ने रावण युद्ध से
पूर्व किया था अनुष्ठान
पुरोहित के रूप में स्वयं
रावण था विराजमान
श्रीराम पर ब्रह्महत्या का लगा था भारी दोष
गुणी रावण पर ना जाने क्यों जताते हैं रोष
रावण पुतले जलाने का जान तो लो कारण
दम्भ, अहंकार, घमंड में चूर था ज्ञानी रावण
गुणों, प्रशासन,पराक्रम में नही था इसके जैसा कोई सानी
सभ्य जगत और जंगल राज में फर्क नही कर पाया ये ज्ञानी
रावण दहन में होते हैं उसके चरित्र के दोष
दशानन को नही था अपनी बुराइयों का होश
ईर्ष्या, क्रोध, लोभ, द्वेष, मोह, आलस्य का करना है हनन
स्नेह, नम्र, क्षमा, शील, धैर्य, आशा के दीपों का हो प्रज्वलन
मिथ्या है रावण के पुतले मात्र को जलाना
सार्थक होगा सोते हुए श्रीराम को जगाना
स्वयं और देश से बुराइयों को दूर भगाओ
अच्छाइयों को अपने जीवन
मे अपनाओ
बुराइयों पर अच्छाइयों की
होती जय जय - कार
इसीलिए विशेष है विजयादशमी का त्यौहार
सभी मित्रों को सपरिवार दशहरे के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं 🙏💐🎊 पंकज जैन, भोपाल
©pankajjain