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दुःख एक ऐसा घर है जहाँ कुर्सियाँ हमें थामना भूल गई हैं, दर्पण हमें प्रतिबिंबित…

दुःख एक ऐसा घर है

जहाँ कुर्सियाँ

हमें थामना भूल गई हैं,

दर्पण हमें प्रतिबिंबित करना भूल गए हैं,

दीवारें हमें समाहित करना भूल गई हैं।

दुःख एक ऐसा घर है जो

हर बार किसी के दस्तक देने

या घंटी बजाने पर गायब हो जाता है

; एक ऐसा घर जो

हल्की सी हवा के झोंके से उड़ जाता है और सबके सोते समय

ज़मीन में गहराई तक समा जाता है। दुःख एक ऐसा घर है जहाँ कोई आपकी रक्षा नहीं कर सकता; जहाँ छोटी बहन बड़ी बहन से बड़ी हो जाती है; जहाँ दरवाजे अब आपको अंदर या बाहर नहीं जाने देते!?