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दया धर्म और नफरतें है

कहां कहा जाता है कि धर्म का प्रसार करो और नफरतें से
मन विचलित होता है जब बात धर्म की होती है नफरत से
कोई तो सोचता होगा कि धर्म क्या है और नफरत होती है
मान भी लूं समाज में धर्म और नफरत सिक्के के पहलू है
आज कहां पत्रकारिता खत्म होती जा रही धर्म की नफरतों
तुम मान लो कहना आज मेरी बातों का अपना धर्म आस्था
©lawnishtha