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एहसास!!

भीनी सी खुशबु महकी कहीं,
हवाओं में झुलसी यादें तेरी!!
ख़ामोश शहर रूक गई हैं सदाए यहीं,
जैसे गहरी नदी बिना आवाज के चली!!
सूरज कि लालिमा से रंगा आसमां,
जैसे आसमान कोई लाल बिंदी लगाई हुई!!
सारे दर्द पराए हों गए वादियों को देखते यू ही,,
ये सुकून हर किसी के नसीब में नहीं!!
भीनी सी खुशबु महकी कहीं,
हवाओं में झुलसी यादें तेरी!!!
©siddhising