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एहसास

आसमानों में निकलते हुए उजाले देखे हैं।
हाँ मैंने घरों में अपने बुजुर्गों के ज़माने देखें हैं।
ख्वाहिशों को दबते ,दबाते देखें हैं।
हाँ मैंने पिता के रूप में देवता मुस्कुरातें देखें है।
मुझे मारकर ,खुदको रोते हुए देखा है।
हाँ मैंने माँ का वो ममता वाला रूप भी देखा है।
मुझे रुलाकर फिर चुप कराते देखा है।
हाँ मैंने भाई बहन का वो प्यार देखा है।
मुझे खिला कर उनको न थकते देखा है।
हाँ मैंने दादा-दादी का वो दुलार देखा है।
मेरी माँ से मेरे लिए उनकी माँ को लड़ते देखा है।
हाँ मैंने नानी के घर मे खुदका संसार देखा है।
चाहते हैं दिल ही दिल मे सब , सबको।
पर कहते नही।
हाँ मैंने प्यार जताने वाली उस झिझक को देखा है।
हर किसी को जीते जी इस दुनियां में अकेला देखा हैं।
हाँ मैंने जनाजे के पीछे लोगो का मेला देखा है।
खुदको खुदसे कई बार लड़ते देखा है।
हाँ मैंने संघर्षों का वो दौर देखा है।
रह लो अच्छे से उनके जो हैं साथ मे।
मैंने जाने के बाद आंखों में इंतजार देखा है।
Gd स्वयं
😊😊😊😊😊🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
©gdswayam