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एक आवाज उस सन्नाटे की ओर

उस सन्नाटे की ओर,
इक आवाज आती है
हवाओं की लहर मे
साजिश नजर आती है
सबकुछ हो जाता है
इस घनी रात मे,
मंजिल छीन जाती है,
उस सन्नाटे की आग मे....
सवेरा ढूंढता है,
हर वो अधेंरा,
उस पत्तों की आहट से,
रोशनी मांगती है,
हर वो लाचार, मजबूर,
एक फरिश्ते की तलाश मे...
मंजिल छीन जाती है,
उस सन्नाटे की आग मे....
कान सुनते नहीं,
उस अन्नायी के अन्नाय को
सब कुछ अंधेरा हो जाता है,
उस दर्द भरी आवाज मे
सब कुछ छिप जाता है,
उस दर्द की आवाज मे,
मंजिल छीन जाती है,
उस सन्नाटे की आग मे....
हम मरते नहीं,
मार दिया जाता है..
हम बेबस है,
इस इंसानियत से,
अंधेरा छा जाता है,
उस दर्द की आवाज मे,
मंजिल छीन जाती है,
उस सन्नाटे की आग मे....
कमजोर हम नहीं,
हमें बना दिया जाता है..
हम डरते नहीं,
हमें डरा दिया जाता है...
हम डरते है,
आवाज उठाने से...
उस समाज मे जगह बचाने से,
मंजिल छीन जाती है,
उस सन्नाटे की आग मे....
जब अंधेरा घना छाता है
डर जाती है माँ,
उस बच्ची की इंतज़ार मे
राह तकती है,
उस थरथाराते हाथों मे
उस मोबाइल की
घंटी की इंतज़ार मे....
लेकिन,
मंजिल छीन जाती है,
उस सन्नाटे की आग मे....
एक आवाज आती है,
उस सन्नाटे की आड मे.....
-𝔻𝕚𝕪𝕒(𝔻𝕦𝕣𝕘𝕒)
Rape is the fourth most common crime against women in India.
Many rapes go unreported in various countries including India.
And a lot of girls commit suicide.
©diyadeepak