S

एक अजन्मी बेटी का सवाल अगर कदम रखती इस दुनिया में, तो तेरी गोदी में आकर खिलती…

एक अजन्मी बेटी का सवाल
अगर कदम रखती इस दुनिया में, तो तेरी गोदी में आकर खिलती माँ,
तुझसे अपनी हर बात कहती, और सुख-दुख में तुझसे मिलती माँ।
आसमान छूती, जग में अपनी एक नयी पहचान बनाती मैं,
आख़िर क्या खता थी मेरी, जो दुनिया देखने से पहले ही मिटा दी मैं?
खुशियों का वो सावन याद कर, जब पता चला कि मैं आने वाली हूँ,
तेरी धड़कन बनकर तेरे आँचल को महकाने वाली हूँ।
फिर अचानक क्यों छा गई उदासी, क्यों चेहरे का नूर ढल गया?
सिर्फ़ इसलिए माँ, कि तेरी कोख में पलने वाला अंश बदल गया?
अगर आती इस जहाँ में माँ, तो तेरा मस्तक गर्व से ऊँचा कर देती,
पिताजी के मान और स्वाभिमान की पगड़ी कभी न गिरने देती।
बुढ़ापे की लाठी बनती, हर एक दर्द हंसकर सह लेती,
बेटों से बढ़कर हर मोड़ पर, मैं साया बनकर साथ खड़ी रहती।
क्या सिर्फ़ इस खौफ़ ने मेरा रास्ता रोक दिया, कि बड़ी होकर दहेज माँगेंगे?
इस खोखले समाज के रीती-रिवाज, हमसे भात और पेज माँगेंगे?
खर्चे और बेटियों को बोझ समझने वाला ये कैसा सिस्टम बनाया है,
जहाँ जननी ने ही अपनी जाई को आने से पहले ही ठुकराया है।
अगर इन पैसों और रस्मों की खातिर तुमने मेरा दम घोंटा है माँ,
तो यकीनन इस दुनिया से ज़्यादा, अब मुझे खुद से ही घीन आती है।
सोचती हूँ, क्यों खुदा ने मुझे चंद लम्हों के लिए भी तेरी कोख सौंपी,
जब ममता ही इतनी कमज़ोर थी, तो क्यों मेरी रूह वहाँ तक आई है?
काश! आज मैं जिंदा होती तो सीने से लगकर रो लेती,
यूँ शब्दों में बिखरकर तुझसे ये कड़वे सवाल शायद ना करती।
💞Sona 💞