खाली पड़े रह मे छा गई तन्हाई
न चले कोई वाहन तब सड़को पर खामोशी छाई
न मनुष्यों को देख पशु-पक्षी को हुई बैचैनी
मंजिले को लग गई इन्तेज़ार करने की बीमारी
समुद्री किनारे को पडी अकेले रहने की मजबूरी
साहिल से टकराने में लहरे में छाई मायूसी
भीगते हुए पैरों से कैसे ले ले अब प्यारी अंगडाई
बाजारो की गालियों भी सुस्ती से जकडाई
तोल मोल के शोर बिना बड़ी मंदी जो आयी
मौल मे सीडीओ की खड खड न देती सूनाई
बिना दर्शक सिनेमा घरों की खुर्शीओ भी ठंड से सीज गई
क्या मंज़र बना पाड़ा है मानो...
पृथ्वी क्या अजमा रही है ना घूमने की ख्वाहिश
सिर्फ समय की घड़ी चल रही है बिना खौफ से डरी
सूर्योदय और सूर्यास्त ना भूले अपने फर्ज की निभाई...
हम सभी गुजर रहे है एक..
महामारी के कातिल लम्हे से...
सबर और सैयम से,
एक दूजे से दूरी रह के,
अपने अपने घर में रह के,
सरकार के आदेश का पालन कर के,
ईश्वर में विश्वास को बुलंद कर के,
अच्छे स्वास्थ की दुआ मांग के,
*कोरोना वाइरस को धरती से भगा देंगे...
हम होंगे कामयाब कोई शक नहीं है इस मे...
©hemantjsha
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