एक पुरानी याद
वो एक पुरानी याद थी, जो दिल में ठहर सी जाती है,
न आए कोई, न जाए कोई, फिर भी कमी सी रह जाती है।
ना कोई कदमों की आहट थी, ना कोई दरवाज़ा खुलता था,
फिर भी हर शाम उसी तरफ़, मन चुपके-चुपके मुड़ता था।
जैसे हवा में घुली खुशबू, जिसका कोई नाम नहीं,
जैसे आँखों में ठहरा सपना, पर उसका अंजाम नहीं।
किसी के होने का एहसास, बिना किसी के होने के,
जैसे कहानी चलती रहती, बिना किसी के खोने के।
ना कोई आया, ना कोई गया, फिर भी दिल यूँ भर आता है,
क्यों हर बीती हुई सी बात, आज भी यादों में मुस्काता है।
वो लम्हे जैसे ठहरे पानी, जिसमें हलचल होती है,
बिना वजह ही दिल के अंदर, हल्की सी आहट होती है।
समय की धूप में फीके होकर, रंग नहीं वो खो पाए,
वो यादें जैसे चाँद की छाया, हर रात फिर लौट आए।
ना कोई रिश्ता, ना कोई नाम, फिर भी गहरा सा नाता है,
एक पुरानी याद ही तो है, जो जीने का बहाना बन जाता है।
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