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एक रंग काफ़ी हैं.....

दिल में रंग भरने के लिये बस इक रंग बाकी हैं..
स्याही से भरदो या, फिर क़ागज कि सफ़ेदी ही काफ़ी हैं..
गुलों का कारोबार हैं यह माना लेकीन
यहा रंग-आे-अल्फ़ाज़ के भी मअनी हैं
ना हम आशिक़ हैं ना ही शाइर
बस एक अक्स हैं, और हमसफ़र माज़ी हैं..
©ekpratt