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एक यात्रा — एक कविता चल पड़ी मैं राहों पर, सपनों की पोटली साथ, धूप भी थी, छाँव…

एक यात्रा — एक कविता
चल पड़ी मैं राहों पर, सपनों की पोटली साथ,
धूप भी थी, छाँव भी थी, अनजाना सा हर एक पथ।
कभी पहाड़ों ने रोका, कभी नदियों ने बुलाया,
हवा ने गीत सुनाए, बादलों ने रंग दिखाया।
थक गई जब पांव मेरे, दिल ने हिम्मत दी फिर से,
“चलते रहना ही जीवन है”, आवाज आई अंदर से।
हर मोड़ पर कुछ सीखा, हर मंज़िल ने ये बताया,
यात्रा ही असली सुख है, मंज़िल ने बस समझाया।
लौटकर जब आई मैं, खुद को नया सा पाया,
एक छोटी सी यात्रा ने, जीवन का अर्थ सिखाया। ✨