क्या इश्क़ की वजह हम बताए,
मुश्किल बनी मंज़िलें क्या सुनाए,
राहों से हर लम्हा ओझल हुआ़,
झुठला ना सका उनकी बेवफ़ाई।
शरीफ़ हैं वो दिल की दीवारों में
कैद जो दर्द की किनारों में,
साहिल से क्यूं डरता हैं दिल,
दास्तान जंग की क्या सुनाए।
हमनें भी किसी ज़माने में,
कोई गज़ल क़रीब से देखी हैं,
यूंही नहीं हम शौक़,
तुकबंदी का है रखतें।
रुकसत अब हर लम्हा यादों से,
चाहत ए ज़माने तेरी क्या करें,
आसूं भी अब न हाल पुंछे,
इल्म है इस बात का दिल से हमें,
- Nilesh Ingole
nilesh2016akola@gmail.com
©nilesh2016
N