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घड़ा

प्यास बुझा दे वो मिट्टी,
पानी भर के लाओ जी,
सोना हो या ना हो,
इसकी पहचान कराओ जी...
माटी को परिवार बना कर,
इसका रूप बनाओ जी,
चारो विश्व घुमाकर..
कुम्भार इसपे हाथ लगाओ जी,
अरे तुम इसको घड़ा बनाओ जी.........
तुम इसको घड़ा बनाओ जी.......
-Durga(Diya)
©diyadeepak