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घर की याद -- प्रयास मात्र - हिमांशु पन्त

दूर देश मा छो मी घर की याद आणि चा,,
याद कनि होली माँ भटुली यन बतानी चा
तिबारी मा बैठी की माँ मेरी खुदेणी होली,,
माजी की खुचली मा छूट्टी भुली बैठी होली
बाबा गयां गोर मा बाटू मेरी देख्दा होला,,
कब आलु नौनु मेरु दिनभर यनि सोचणा होला
ठंडी हवा धार कु पानी,, धार धार बगेणू होलु
बल्दु की घांडीयू ते छुट्टु भुला बजाणु होलु
चौक मा बैठ की सभी लोग खुदेणा होला
आण जाण वालो से राजी खुशी पूछणा होला
एक कोना मा खड़ी ह्वेकि मेरी प्यारी भी रोणि होली
आंसुओ की धार आंखियुं न बगाणी होली
मजबूर छो मी जल्दी बॉड़ी ए जोलु
सब्यु ते बहुत जल्दी ऐके भीटे जोलु
शीर्षक - घर की याद,,, प्रयास मात्र --- हिमांशु पन्त
©himanshup