A

ग़म

तेरे जाने के ग़म से अधूरे हो गए थे हम,
तन्हाइयों में तुझे ही सोचने को मजबूर हो गए थे हम,
फिर ये सोच कर खुद रुक गए हम,
अगर तुम मेरी ही होती तो दूर ही क्यों जाती हम से।
©atulverma