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गोबर का अपना इतिहास और सम्मान प्रकृति प्रेमी

गोबर का अपना इतिहास और सम्मान प्रकृति प्रेमी
जो देखकर पहचान लेते हैं तो बता तो सकते हैं क्या
प्रकृति में ऊर्जा का स्रोत है और ईंधन का शोधन भी
यह प्रकृति का सबसे अच्छा और बेहतरीन स्रोत है
प्राकृतिक खाद और पौधों का जीवन पालक है गोबर
कुछ लोगों को लगता है कि यह विद्रोही है प्रकृति का
तो कुछ लोग इसे अच्छा शुद्ध इसको पवित्र मानते हैं
कुछ लोग तो इस पर रिसर्च भी करते हैं इंधन शोधन
कुछ नहीं तो इसको गोबर गैस या बायोगैस बनाया
कुछ की तुलना इससे कर दी जाती है केंचुआ खाद में
कितना प्रकृति प्रेमी है तुम जानते हो यह वन संरक्षण
इसके होने से प्रकृति को नुकसान नहीं यह तो मित्र है
पशुधन का अपशिष्ट होने के बावजूद भी घृणित नहीं
सच कहूं तो इसका नाम जानवरों के आधार से पड़ता
कोई गाय का कहता तो कोई भैंस का तो कोई बकरी
मगर सबकी अपनी अलग-अलग अपशिष्ट है गोबर
क्योंकि सब की अलग मान्यता और सबका अलग
यह प्रकृति के इतने नजदीक है कि घर आंगन इससे
सजदा का बढ़ता और निखरता है प्रकृति प्रेमी गोबर
गांव में आज भी कुछ परंपराएं से पहले लेपा पोता है
कोई भी मांगलिक कार्य हो प्रकृति का पहला अर्पण
मान्यता तो यहां तक हो गई किसके नाम पर पर्व पड़ गया कई लोगों के नाम भी इसके नाम गोवर्धन पुकार मगर क्या करें इसकी भी अपनी पीड़ा समझता कौन
बस इतना है कि इसकी मान्यता अपनी अलग-अलग है
©lawnishtha