कर्णधार तू बना तो हाथ मे लगाम ले
क्रांति को सफल बना, नसीब का न नाम ले
भेद सर उठा रहा, मनुष्य को मिटा रहा
गिर रहा समाज, अपनी बाजुओं मे थाम ले..
त्याग का न दाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले.!
लोग आस मे खड़े गली गली के मोड़ पर
एक का विचार छोड़ , दृष्टि दे करोड़ पर
अन्यथा प्रतीति बढ़ रही है, तोड़ फोड़ पर
न्याय भी हमे मिले की नीति भी नहीं हिले
प्यार है मनुष्य से तू रौशनी से काम ले....
त्याग का न दाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले !!
यह स्वतंत्रता नहीं की एक तो अमीर हो,
दूसरा मनुष्य तो रहे मगर फ़कीर हो,
न्याय हो तो आर पार एक ही लकीर हो
वर्ग की तनातनी, ना मांनती है चांदनी
चांदनी लिए चला तो धुप हर मुकाम ले.....
त्याग का ना नाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले.!!
कर भला गरीब का तो डर न सम्यवाद से
नाश है प्रयोगवाद का प्रयोगवाद से
तू स्वतंत्र देश को बचा सदा विवाद से
यों नई दिशा दिखा की दीप की हँसे शिखा
सम्यवाद भी मिले तो चुम ग्राम ग्राम ले....
त्याग का न नाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले.!!!
रामराज्य हो तो मुफ्त मै मिला करे दवा
मुफ्त तो पढ़ा करे कि जैसे मुफ्त है हवा
न्याय मुफ्त मे मिले बिहार हो या मालवा
तू हमे उबार तो समाज को सिंगार तो
कोटि कोटि के हृदय में कर सदैव धाम ले....
त्याग का ना दाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले !!
यह न कर सका तो तख़्त ताज छोड़ दे
और के लिए बना जगह, मिजाज छोड़ दे
छोड़ना है कल तुझे हठीले आज छोड़ दे
आके मिल समाज मे कि भाग ले स्वराज मे
शांति भोग किन्तु बाग़डोर से विराम ले...
त्याग का ना दाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले !!!
रहनुमा बने बिना भी उम्र बीत जाएगी
ताज तख्त की बिना भी प्रीति गीत गाएगी
कोकिला कहि रहे बसंत गीत गाएगी
राश्ता दे भीड़ को, संवार अपने नीड़ को
पीपलो की छांव मे तू बैठ राम -नाम ले....
त्याग का ना दाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले !!!!!!
©abhitrip
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