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ग़ज़ल

तेरी इन आँखों की कस्तियों को,
जूठा नहीं ठहराएंगे
और तू मुझे मरने को कहेगी,
तो हम मर नहीं पाएंगे......
_Durga(Diya)
©diyadeepak