हालात के "क़दमों" में "क़लंदर" नहीं गिरता,
टूटता भी जो है "तारा" तो "ज़मीं" पर नहीं गिरता।
गिरते तो हैं बडे "शौक़" से "समंदर" में तो दरिया,
लेकिन किसी दरिया में कभी समंदर नहीं गिरता।
इतना तो हुआ फायदा मेरी "क्रिकेट" की कमी से
के "उबैद कमाल" के उपर अब कोई फिसलकर......
©ubaidkamal
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