एक अरसे से अकेला चल रहा हुँ मैं,
टूटे हुवे दिल के साथ बसर कर रहा हुँ मैं,,
छोड़ कर चले गये अपनो के गम के साथ जी रहा हुँ मैं,
कमजोर पड़ रहे हौसले के साथ चल रहा हुँ मैं ,,
दिल मे दर्द होठों पे मुस्कुराहट लिए चल रहा हुँ मैं,
आज भी उस बेवफा के दिए जखमों से उभरने की कोशिश कर रहा हुँ मैं
अधुरे रह गए थे जो उन सपनो को फिर से बुन रहा हुँ मैं ,
चल सकूँ साथ जिसके वो हमसफर ढूंढ रहा हूँ मैं ,,
जगा दे जो फिर से जीने की इच्छा मुझमे ,
फिलहाल ऐसा शख्स ढूंढ रहा हुँ मैं,,
हाँ 'हेमंत' अब थक चुका हुँ मैं ,,
बस दो पल चैन की नींद माँग रहा हुँ मैं,,
©kaliramana
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