हाँ मैं जिद्दी हूँ
मैंने लड़ना छोड़ा है,
पर ज़िद्दी आज भी हूँ|
मैंने किस्मत को मेरे खिलाफ रंग बदलते देखा है,
पर उम्मीद आज भी रखता हूँ।
मैंने ज़माने को बदलते देखा है,
पर मैं आज भी वैसा हूँ।
मैंने मेरी ख्वाहिश को मिटते देखा है,
पर उनकी चाहत अभी तक रखता हूँ।
हाँ मैं जिद्दी हूँ.......
क्यूंकि ख्वाहिश बेहिसाब रखता हूँ......
तुम क्या बात करते हो मेरी बेवक़ूफ़ सी ज़िद्द की,,,
मैंने पतझड़ के मौसम में फूल खिलते देखा है।।।
हाँ मैं जिद्दी हूँ......
क्यूंकि उस वक़्त को मैंने मेरा होता देखा है।।।।
©mohiwrite
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