माना कि बात हुए दिन कई बीत गए
क्या कहे क्या हार गए क्या जीत गए
वो हमे समझ जाएंगे बस यही उम्मीद
खामोशी बस, जाने कहा वो गीत गाए
ज़िन्दगी मिलने और बिछड़ने का नाम
साथ जो थे, ना जाने कहा वो मीत गए
आवाजे आती है ना जाने कहा से हमे
ढूंढते है आज में, जो हमारे अतीत गए
सुरों में ढालते, साज़ भी बजाते शाहिद
सब है पास लेकिन भूल वो संगीत गाए
©shahidkhan
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