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हे मेरी प्रिया

हे मेरी प्रिया ! तेरी बैचेनी समझ तो पाता हूं,
है हमें दुःख,लॉकडाउन के वजह से घर नहीं जा पाता हूं,
घर के किसी बन्द कमरा में,तेरी दर्द भरी दास्ताँ जो सुनता हूं, मन मंदिर में प्रेमप्याला ढ़ुंढ़ने लगजाता हूं!
हे मेरी प्रिया!रोना धोना हठ करना तो बच्चों के काम हैं,
हँसना,मुस्कुराना,मधुरवचन बोला,यही हमारी खुबियाँ हैं,
तू है सुन्दर ,तेरी वाणी है सुन्दर,
क्या कहूं मेरा दिल कहता है,है तेरी चाहत सुन्दर!
हे मेरी प्रिया! है तेरी ईश्क की कलानिराली,
मीठी रसपान हेतु स्वयं पहुंच जाते आलि;
क्या कहूं,कैसे कहूं,क्या है हाले-दिल?
तेरे बिन लगता है मानों, खाली है जीवन के मधुप्याली!
हे मेरी प्रियेत्तमा! न हो उदास या खामोश,
है मेरा वादा आऊँगा जरूर तेरे पास;
जीवन की दर्द हम कम कर देते,होते अगर काश,
मैं आऊँगा दिल के चमन पे प्रेम की खुशबू लेकर जल्द तेरे पास!!
--------- संदीप कुमार "संजन"
भगवानपुर,अररिया,बिहार
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©skmahto