है मीना तेरी हंसी कु कोई जवाब नि छू
तेर गीतों की धुन मा मि ते पागल छू
जब आन्दु चौमास की कुरेडी गांव मा
में सुन्दो तेर गीतों की धुन अपण कानू मा
है मीना ..............
दिन बीत जान्दू तेरी याद मा
जब खुद तेरी लगदी मेरी जिकुड़ी मा
मन मेरु होई जान्दू उदास
अब नि कटेन्दू यों चौमास
है मीना..........
याद ऑन्दी तेरी दिल मा
जब ऐकुले बैठी रन्दौ मैं दिन मा
ओर कोई चारु नि छू
तेर सिवा मेरु ओर कोई नि छू
है मीना.........
संजय रावत जौनपुर वाले
(मेरी पहली गढ़वाली कविता )
©sanjulv
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