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हे राम! के बाण धीरज बनो तुम

हे राम! के बाण धीरज बनो तुम
मन के अनल मे साहस भरो तुम
महाकाल की शंख ध्वनि अब सुनो तुम
अघ के कुहासे से मत डरो तुम
तम के तिमिर से डट कर लड़ो तुम
अंधेरा बहुत है उज्जवल बनो तुम
दधीचि सा दानी बनाओ स्वयं को
करो पान विष का महेश्वर बनो तुम
हे राम! के बाण धीरज बनो तुम
मन के अनल मे साहस भरो तुम
©aaryan