Here's a poem about love and separation:

प्रेम की धुन

तेरी याद के तार पर
बजती एक अधूरी धुन
दिल के कोने में छुपी
एक अनकही सी सुन

दूरियाँ बढ़तीं जाती हैं
पर भावनाएँ करीब
तेरी आँखों के संसार में
मेरा प्रेम है अलीब

कभी मिलन की आस में
कभी विरह की वेदना
प्रेम एक अजीब सफर है
जिसकी नहीं कोई सीमा