Here's a poem about रात और सितारे:

नीली रात में चमकते सितारे

धरती के ऊपर बिखरी उजाले की पारे
चुपके से झिलमिल करते हुए
जैसे कोई राज़ छुपाते हुए

काली पर्दे में जगमग जगमग
चाँदनी में नाचते निराले
मौन कहानियाँ कहते हुए
अनकही सी व्याकुल ख्वाहिशें

आँखों में समाते हुए सपने
मौन रात के गहरे आँचल में
टिमटिमाते हुए सितारे
चुप-चाप मुस्कुराते रहे