Here's a poem about रात और सितारे:

नीली चादर में सजे सितारे

चुपके से फैली रात काली
मौन में डूबी हर एक डाली

चमक रहे हैं सफेद मोती
आकाश में बिखरी ज्योति

कभी टिमटिमाते, कभी जगमगाते
धरती को अपनी चमक सुनाते

रहस्य भरी इस नीलिमा में
सपने हैं जगे हर कोर में