Here's a poem about समुद्र और लहरें:

नीले अनंत में उठती लहरें

चंचल तरंगें, बेताल नृत्य
चट्टानों से टकराती हुई
कभी मीठी, कभी क्रोधित
समुद्र की अनकही कहानी

सफेद झाग, नीला पानी
हर लहर में छुपा एक सपना
कभी शांत, कभी उग्र
अपने भावों का गीत गाती

क्षितिज तक फैली अनंतता
हर लहर एक नया संगीत
धरती और आकाश के बीच
नाचती हुई स्वतंत्र आत्मा