हमेशा से शिकायतें रही हैं उन्हें,
हम और हमारी पुरानी रेडियो से;
वे हमेशा कहा करते थे,
हो जाओ 'आपडेट' और अपनालो नए दौर को,
ऐसा नहीं था, की कोशिश न कि थी हमने,
पर न अपना पाए और न ही छोड़ पाए अपने रेडियो को....
अब आलम कुछ ऐसा है कि,
होना पड़ा इस 'आपडेट' दुनिया से दूर;
पड़े हैं, उस दुनिया से दूर छोटे से एक कोने में,
जहाँ बसती है -तन्हाई,सुकून
और रहते है हम और हमारी पुरानी रेडियो।
©sushee
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