वो नटखट है थोडी नादान है
पापा की परी तो सबकी लाडली भी है
शरारती है शरारत भरी अठखेलिया खेलती है
वो घर के आंगन की रौनक है|
कभी कभी होशियारी भी दिखाती है
माँ की तरह गलतियाँ बताती है तो कभी गुरू की तरह समझाती है
कभी उदास नही होने नही देती कुछ बातें ऐसी भी कह जाती है|
घर में छोटी है सबके लिए अनोखी है क्योकि वो घर की बेटी है
©kamalsingh
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