S shrutid hi 23 जुलाई 2025 हमारी नानी वो खूब लड्डी थी हालातो से, कभी कमजोर न पड़ी जस्बातो से, अकेली थी वो सात जिंदगी को संभाले में, लेकिन कोई कमी नहीं छोड़ी थी पालने में, आज उसकी साँसों की डोर टूट गयी, हमें जोड़ने वाली गॉठ खुल गई।।।©shrutid