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हमारी नानी

वो खूब लड्डी थी हालातो से,
कभी कमजोर न पड़ी जस्बातो से,
अकेली थी वो सात जिंदगी को संभाले में,
लेकिन कोई कमी नहीं छोड़ी थी पालने में,
आज उसकी साँसों की डोर टूट गयी,
हमें जोड़ने वाली गॉठ खुल गई।।।
©shrutid