पत्तों में छुपी हरी मुस्कान
धरती की है यह अनमोल शान
पहाड़ों पर बहती ठंडी हवा
झरनों में झूमती नृत्य-कला
फूलों की महक, बादलों का तान
प्रकृति है जैसे एक अनोखा गान
शाम ढलती, सूरज की लाली
बिखेरती चारों ओर निराली
पत्तों में छुपी हरी मुस्कान
धरती की है यह अनमोल शान
पहाड़ों पर बहती ठंडी हवा
झरनों में झूमती नृत्य-कला
फूलों की महक, बादलों का तान
प्रकृति है जैसे एक अनोखा गान
शाम ढलती, सूरज की लाली
बिखेरती चारों ओर निराली