वक्त की गर्दिशों में हर शख्स परेशान सा क्यों है
यूं तो तेरे कई अपने हैं पर तू तन्हा सा क्यों है
पैरों में काटे थे और सफर भी तन्हा था
आज तू हमसफर की तलाश में क्यों हैं
अपनों की जीत की आरजू रखते हो
खुद को हराने किए जुस्तजू क्यों है
वजूद तेरा इन चंद लोगों के रहम पर नहीं है
यह तू जानता है फिर भी अनजान क्योंयह तू जानता है फिर भी अनजान क्यों है
तेरी सोच तेज है तलवार से भी
तेरे पास कलम भी है तू घबराता क्यों है ,
अभिषेक तुम अपना वक्त खुद बदलोगे तू ही नाजुक हालातों से हताश क्यों
©abhitrip
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