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हुस्न तुम्हारा

शीर्षक -- हुस्न तुम्हारा
लेखक - हिमांशु पन्त
ये हुस्न तुम्हारा मानो सूरज भी देखे तो जल कर रख जो जाये 😍😍,,.
ये हुस्न तुम्हारा मानो पानी भी देख कर ठंडा पड़ जाये,😍😍
बात अगर माथे की बिंदिया की करूं तो उसका हर कोई दीवाना हो जाये,, झील सी आँखों मे कोई चुपके से डूब जाये 🌹🌹
तेरा मुस्कुरा देना जैसे पतझड़ में बहार हो जाये….
जो तुझे देख ले वो तेरे हुस्न में ही खो जाये….❤️❤️
तुम्हारे जिस्म की बनावट संगमरमर की मूरत से कम नहीं जिसकी जितनी तारीफ़ की जाये..
तुम्हे दिन रात देखते रहने का ख्याल हमेशा मेरे मन मे आये 😍😍😍💓💓
तुम्हारे जुबान से निकले जो बोल तो मानों कोयल भी शरमा जाये…
तुम जो अपने जुबान से मर जाने को कहो तो मरने वाले को भी मरने का मजा आ जाये….🌹🌹❤️❤️
©himanshup