हवा ने आज पायल बाँधी,
आसमान को साथी मान लिया,
धीरे-धीरे झूमते हुए
धरती को अपना मंच जान लिया।
पेड़ों की डालियाँ ताली बन गईं,
पत्ते जैसे गीत गुनगुनाने लगे,
हर झोंके में छुपी एक लय थी,
जिस पर बादल भी थिरकने लगे।
कभी शरारती बच्ची बनकर
गालों को छूकर भाग जाती,
कभी माँ की ममता सी नरम
थकी रूह को सहला जाती।
उसका कोई रूप नहीं,
फिर भी हर जगह दिखाई देती,
कभी खुशियों की धुन बनकर
दिल में चुपके समा जाती।
हवा का ये अनोखा डांस,
ना सुर, ना ताल, ना कोई राग,
फिर भी सबसे सुंदर लगता,
जैसे खुद प्रकृति का अनुराग। 🌿✨
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